Electro Homeopathic Treatment of Hyperthyroidism

Electro Homeopathic Treatment of Hyperthyroidism: Thyroid हमारे शरीर में एक hormones पैदा करने वाली ग्रंथि है। यह Thyroid hormones पैदा करती है, Thyroid ग्रंथि को अवटु  ग्रंथि भी कहा जाता है, यह ग्रंथियाँ मानव शरीर में पाई जाने वाली सबसे बड़ी अंतस्रावी ग्रन्थियों में से एक है। यह द्विपिंडक रचना हमारे गले में स्वरयंत्र के नीचे क्रिकॉयड कार्टिलेज के लगभग समान स्तर पर स्थित होती है।

Electro Homeopathic Treatment of Hyperthyroidism
Electro Homeopathic Treatment of Hyperthyroidism

हमारे शरीर की Metabolic क्रिया में थायरॉइड ग्रन्थि का विशेष योगदान होता है। यह ग्रन्थि थायरोराइन (T4), ट्री-आइडोथाइरोराइन (T3)और थाइरोकैलसिटिनीन नामक hormones स्रावित करती है, यह hormones शरीर के Metabolic दर को प्रभावित करते है तथा शरीर की सभी प्रक्रियाओं और गति को नियंत्रित करते है। सामान्य Thyroid hormones शरीर में वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के Metabolic को नियंत्रित रखता है और रक्त में शर्करा, कोलेस्ट्रॉल तथा फोस्फोलिपिड की मात्रा को कम करता है।

इसके अलावा यह पेशियों, लैंगिक तथा मानसिक वृद्धि को एवं हृदयगति और रक्तचाप को नियत्रित करता है। इस ग्रन्थि से संबंधित दो प्रकार के विकार होते है।

  • Thyroid Gland की अतिसक्रियता (Hyperthyroidism)
  • Thyroid Gland की निम्नसक्रियता (Hyporthyroidism)

हाइपरथॉयराइडिज्म क्या है : What is Hyperthyroidism in Hindi

यह Thyroid ग्रंथि की अतिसक्रियता के कारण होने वाला रोग है। इसकी अतिसक्रियता के कारण T4 और T3 hormones का आवश्यकता से अधिक उत्पादन होने लगता है। जब इन हार्मोन्स का उत्पादन अधिक मात्रा में होने लगता है तो शरीर ऊर्जा का उपयोग अधिक मात्रा में करने लगता है। इसे ही  Hyperthyroidism कहते है। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाई जाती है।

बड़ों की तुलना में बच्चों में थायराइड की समस्या कम पाई जाती है लेकिन यदि बच्चों में यह समस्या हो जाए तो यह ज्यादा गंभीर स्थिति हो जाती है क्योंकि इससे सीधा-सीधा बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर असर पड़ता है जन्म के बाद प्रत्येक नवजात की TSH (Thyroid Stimulating hormone in  ) की जाँच जरुरी है। यह तब होता है यदि माता को पहले से ही ग्रेव डिजीज (Grave’s disease) हो इसके कारण माता के रक्त में मौजूद थाइरो-स्टीमूलेटिंग एंटीबॉडिज (Thyroi-stimulating antibodies)  उसके प्लेसेंटर( Placenta ) को पार कर के गर्भ शिशु की थायरॉइड ग्रन्थि को उत्तेजित करते है और थायरॉइड hormones का आवश्यकता से अधिक उत्पादन होने लगता है। सामान्य तौर पर यह एंटीबॉडिज (antibodies) कम मात्रा में ही होती है इसलिए इससे शिशु को कोई खास नुकसान नहीं पहुँचता।

इसमें किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि दो से तीन महीने के अन्दर स्वत ही यह एंटीबॉडिज शिशु के रक्त से हट जाती है। परन्तु कुछ स्थितियों में इन स्टीमूलेटिंग एंटीबॉडीज का स्तर ज्यादा हो जाता है जिस कारण गंभीर थायरोक्सिोकोसीस (Thyrotoxicosis) की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस स्थिति में तुरंत ही उपचार की आवश्यकता होती है। शिशुओं में हाइपरथॉयराइडिज्म के लक्षण व्यस्कों के समान पाए जाते है जैसे हृदयगति का सामान्य से अधिक चलना, चिड़चिड़ापन, लाल एवं नमीयुक्त त्वचा होना आदि। कुछ समय चिकित्सा करने पर यह स्थिति सामान्य हो जाती है।

हाइपरथॉयराइडिज्म होने के कारण : Causes of Hyperthyroidism

हाइपरथॉयराइडिज्म होने के पीछे बहुत सारे कारण है एक तो किसी बीमारी के कारण होता है दूसरा जीवनशैली, आहार, आनुवांशिकता के कारण भी होता है।

पहले जानते हैं कि किन रोगों के कारण हाइपरथॉयराइडिज्म होता है-

1- हैशीमोटो डिजीज (Hashimoto’s disease) – यह रोग Thyroid Gland के किसी एक भाग को निष्क्रिय बना देता है।

2- थॉयरोडिटिस (Thyroiditis)– यह Thyroid Gland में सूजन आने के कारण होता है। प्रारम्भ में इसमें Thyroid hormones का अधिक उत्पादन होता है और बाद में इसमें कमी आ जाती है जिस कारण हाइपरथॉयराइडिज्म  हो जाता है। कईं बार यह महिलाओं में गर्भावस्था के बाद देखा जाता है।

  • डायट -आहार में आयोडीन की कमी के कारण हाइपरथॉयराइडिज्म   हो जाता है इसलिए आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • ग्रेव्स डिजीज (Graves-disease)– ग्रेव्स रोग व्यस्क लोगों में हाइपरथॉयराइडिज्म होने का मुख्य कारण है। इस रोग में शरीर की प्रतिक्षा प्रणाली ऐसे एंटीबॉडिज (Antibodies) का उत्पादन करने लगती है जो टीएसएच (TSH) को बढ़ाती है। यह आनुवांशिक बीमारी है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है।
  • गॉयटर (Goitre)- घेंघा रोग के कारण।
  • विटामिन बी12 (Vitamin B12)-   के कारण भी हाइपरथॉयराइडिज्म   हो सकता है।

इसके अलावा डायट, लाइफस्टाइल और हेरिडिटी के कारण भी हाइपरथॉयराइडिज्म होने का खतरा होता है-

  • अधिक तनावपूर्ण जीवन जीने से Thyroid hormone  की सक्रियता पर असर पड़ता है।
  • आहार में आयोडीन की मात्रा कम या ज्यादा होने से थायरॉइड ग्रंथियाँ विशेष रूप से प्रभावित होती है।
  • यह रोग अनुवांशिक भी हो सकता है। यदि परिवार के दूसरे सदस्यों को भी यह समस्या रही हो तो इसके होने के संभावना अधिक रहती है।
  • महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड हार्मोन्स में असंतुलन देखा जाता है क्योंकि इस समय महिलाओं के शरीर में कई hormonesल बदलाव आते हैं।
  • भोजन में सोया उत्पादों का अधिक इस्तेमाल करने के कारण।

 Symptoms of Hyperthyroidism in Hindi

 Hyperthyroidism symptoms:

शरीर में थायरॉइड hormones की अधिकता के कारण मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है और हर क्रिया तेजी से होने लगती है।

  •  घबराहट
  •  चिड़चिड़ापन
  •  अधिक पसीना आना।
  •  हाथों का काँपना
  •  बालों का पतला होना एवं झड़ना।
  •  अनिद्रा
  •  मांसपेशियों में कमजोरी एवं दर्द रहना।
  •  दिल की धड़कन का बढ़ना।
  •  बहुत भूख लगने तथा भोजन करने के बाद भी वजन का लगातार घटना।
  •  ओस्टियोपोरोसिस की समस्या जिसमें हड्डियों में कैल्शियम तेजी से खत्म (hyperthyroidism symptoms)होता है।
  •  महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता।

Electro Homeopathic Treatment of Hyperthyroidism

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